Anar Khane Ke Fayde

आज की पोस्ट में हम जानेंगे अनार के फायदे के बारे में हम सभी यह तो जानते हैं कि अनार का फल खाने से खून बढ़ता है लेकिन क्या आप अनार के पेड़ के और उसकी पत्तियों के औषधीय गुण के बारे में जानते हैं तो इन सारी चीजों के बारे में आज हम विस्तारपूर्वक जानेंगे।

अनार का रासायनिक संगठन

अनार के बीज में प्यूनिकिक अम्ल तथा छिलके में प्यूनिकेलिन अम्ल पाया जाता है।how to increase blood

अनार के फलों में शर्करा, प्रोटीन ,वसा, कैल्शियम ,मैग्नीशियम, फॉस्फोरस, पोटेशियम तथा आयरन की प्रचुर मात्रा पाई जाती है, एवं इसके छिलके में पेलेटिरिन नामक अम्ल अम्ल पाया जाता है।

इसमें विटामिन सी  प्रमुख मात्रा में पाए जाता है ।

 अनार का जूस या फल खाने से शरीर में खून की कमी दूर होती है आप रोज एक अनार खाओगे तो आपके शरीर में खून की कमी नहीं आती क्योंकि इसमें आयरन प्रचुर मात्रा में होता है जिससे हमारे शरीर में खून बढ़ता है।

अनार के और भी कुछ फायदे के बारे में जानते हैं

अनार का तेल: अनार के तेल की मालिश करने से चेहरे की झाइयां और काले धब्बे भी नष्ट होते हैं। ओर पढे- चेहरे पर ग्लो लाये कुछ आसान टिप्स

गंजापन: दूर करता है अनार के ताजे हरे पत्तों का रस निकाल लें 100 ग्राम और उसमें आधा लीटर सरसों का तेल मिलाकर तेल को पका लें पकाने के बाद तेल को सिर पर लगाएं इससे गंजापन दूर होता है तथा बालों का झड़ना भी रुक जाता है।घर पर ब्लड प्रेशर चेक करे 

सिर दर्द: अनार की छाल को घिसकर कपाल पर लेप लगाने से सिर का दर्द तथा आधासीसी वाला सिरदर्द में बहुत लाभ मिलता है

नाक से खून आना: अनार के फलों का एक दो बूंद रस नाक में डालने से या सूंघने से नाक से खून बहना बंद हो जाता है यहां नाक से खून आने की बहुत उत्तम होती है।

आंखों में दर्द: अनार के 5 पत्तों को पानी में भिगोकर पोटली बनाकर आंखों पर फेरने से नेत्र वेदना (आँख का दर्द बंद हो जाता है) में लाभ मिलता है।

कान के रोग: अनार के ताजे पत्तों का रस 100 ml  उसमें 400ml गोमूत्र और 100ml  तिल का तेल तीनों को मंद आंच पर पकाएं तेल मात्र शेष रहने पर छानकर रख लें और फिर सुबह शाम तेल को हल्का सा गर्म करके 2-3 बूंद कान में डालने से कान का दर्द और बहना भी बंद हो जाता है और बहरापन में भी लाभ मिलता है।

दातों में : अनार और गुलाब के शुष्कफूलों को पीसकर मंजन करने से दंतो से पानी आना बंद हो जाता है, और केवल अनार की कलियों के चूर्ण से मंजन करने से मसूड़ों से खून आना बंद हो जाता है और इसके 8 से 10 पत्तों का चूर्ण बनाकर उससे मंजन करने से दांतों का हिलना मसूड़ों से खून और मसूड़ों से खून का आना बंद हो जाता है और सूजन में भी आराम मिलता है।

मुंह के छाले : अनार के 10 ग्राम पत्तों को 400ml पानी में उबालकर उस से कुल्ला करने से छालों में आराम मिलता है।

सर्दी खांसी : अनार के ताजे हरे पत्तों का 1 लीटर रस निकाल लें और उसमें मिश्री मिलाकर शरबत बना ले और 20 ~ 20ml दिन में दो से तीन बार लें इससे आवाज का भारीपन एवं सर्दी खांसी दूर होती है।

अनार के छिलके को मुंह में रखकर चूसने से भी खांसी में लाभ होता है।

अजीर्ण दूर करे :  पके हुए अनार के 10ml रस में भुना हुआ 2 ग्राम जीरा और 5 ग्राम गुड़ मिलाकर दिन में दो से तीन बार लेने से सभी प्रकार के अजीर्ण  शीघ्र नष्ट हो जाता है।

भूख बढ़ाने के लिए : अनार के पत्तो को पीसकर उसमें एक भाग सौंदा नमक को मिलाकर दोनों का चूर्ण बना लें और सुबह शाम 4 / 4 ग्राम भोजन के पहले पानी के साथ सेवन करने से भूख अच्छी लगती है तथा अजीर्ण में भी लाभ मिलता है।

मुख में स्वाद नहीं आने पर : अनार के रस को मुंह में रखकर धीरे-धीरे चला चला कर पिये इस प्रकार 8-10 बार करने से मुंह का स्वाद और बुखार के कारण कड़वा मुह ठीक हो जाता है।

मीठे अनार के रस में शहद मिलाकर पीने से भूख अच्छी लगती है।

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बवासीर में लाभ अनार से : 

बवासीर सुबह-शाम अनार के पत्तों का रस 5 से 10 ml पीने से खूनी बवासीर में लाभ मिलता है।

100 ml अनार के रस में 10 ग्राम गाय का दूध और उसमें 65 मिलीग्राम यवक्षार मिलाकर पीने से दर्द युक्त खूनी बवासीर का निदान होता है।

यवक्षार बनाने की विधि :
जो का पौधा जो आध पका हो उसे काटकर छोटे छोटे टुकडो में बाट ले और उन टुकड़ों को पानी में भिगो दें और उस पानी को 6 से 7 घंटे के लिए रख दें और बीच-बीच में उस पाने को हिलाते रहे फिर उसके ऊपर के टुकड़े को हटा कर फेंक दें और जो पानी बचता है  उसे पकाये ओर अंत मे जो शेष सफेद सफेद पदार्थ बनता है वही यवक्षार रहता है उसको सुखा लें और सुखाकर रख लें।

दूसरी विधि यवक्षार बनाने की : 

आधे पके हुए जौ के पौधों को उखाडकर उनके टुकड़े कर लें . इसको जलाकर राख बना लें . राख में पानी मिलाकर अच्छी तरह से हिलाएं. इसको 6-7 घंटे तक पड़ा रहने दें. बीच बीच में अच्छे से हिलाते रहें. अंत में जब पानी बिलकुल शांत हो  जाए तो फिर ऊपर के तिनके निकाल कर पानी को निथारकर फेंक दें . नीचे के बचे हुए सफ़ेद रंग के गाढे द्रव को धीमी आंच पर धीरे धीरे पकाएं . जब यह काफी गाढ़ा हो जाए तो इसे सुखा लें . यही मटमैला सा पाऊडर यवक्षार कहलाता है।

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